प्रश्नोत्तर P13-0138 · भाग 13
गुरु जी, आत्मा बंधन में है, लेनदेन में है — तो क्या बंधन में रहते हुए समर्पण हो सकता है, या बंधन खत्म होने के बाद समर्पण होगा? कृपया मार्गदर्शन करें।
समर्पण का भाव बना सकते हो। धीरे-धीरे बंधन उधर खत्म होगा, इधर समर्पण बढ़ता जाएगा। और एक समय ऐसा आएगा कि आप बंधनों से जैसे छूटोगे, समर्पण हो जाएगा।
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