प्रश्नोत्तर P12-0188 · भाग 12
गुरु जी, मानसिक राग-द्वेष नहीं छूट रहा। विचार को सोचना भी तो प्रतिक्रिया देना है ना?
नहीं, ऐसा नहीं है। विचार — कोई बात नहीं, सोचते-सोचते एक दिन थक जाओगे। बस शरीर से उसके साथ मत करना, प्रतिक्रिया मत दो, बात खत्म; पांच इंद्रियों का उपयोग बाहर मत करना। (सोचते-सोचते संकल्प बन रहा हो, तब भी) थक जाओगे; समय हो तो अपनों की कुटिया में आ जाओ।
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वीडियो: 15 रात अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-08