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प्रश्नोत्तर P12-0134 · भाग 12

अगर मैं अपने केंद्र से हटकर कहीं अपनी बढ़ोतरी के लिए गया, दूर से लगा था कि वहां ऐसा होगा, पर वहां मुझे वो मिल नहीं रहा — तो क्या मैं दोबारा वहीं आ सकता हूं? मुझे क्या करना चाहिए?

अगर आपको नहीं हो रहा, तो आप लौटकर वहीं आओगे जहां आपका केंद्र था। लेकिन अगर आपके अनुसार हो ही रहा है — वो आप ही फील कर पाओगे — तो फिर बहुत आगे बढ़ जाओ, ताकि आपके पीछे जो लोग थे वो भी आपसे प्रभावित हों, समाज भी आपके कर्म से प्रभावित होकर आपकी तरफ बढ़ना शुरू करे। हमें जांचना है कि अगर मैं कहीं गया, तो हो क्यों नहीं रहा, इसका जिम्मेदार कौन — अगर मैं हूं, तो उससे पूछना चाहिए कि किस वजह से नहीं हो पा रहा, क्या आप मेरी योग्यता बढ़ाने में मेरी सहायता करोगे? और अगर उसकी वजह से नहीं हो रहा, तब तो उसे छोड़ देना चाहिए। अगर किसी ने बोर्ड लगाया है, तो वो हां ही बोलने वाला है; हां के बाद हो रहा है कि नहीं, ये मुझे जांचना है। पहले जांचना पड़ेगा कि मैं लेने क्या गया, उसके पास वो है भी कि नहीं, और क्या मैं वही लेने की बात कर रहा हूं — कभी-कभी हम व्यवस्था को लेकर भाग जाते हैं। मेरे पास लोग आए, जिसके लिए आए थे वो हो रहा था, लेकिन गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाए — मैंने कहा एसी तो मैं नहीं दे सकता, क्योंकि एसी के लिए तो मैंने बुलाया ही नहीं। एक शिक्षक और उसका स्टूडेंट आए, बोले सुबह भूख लग जाती है — मैंने कहा ये नियम मैं नहीं तोड़ूंगा, क्योंकि कोई बीमारी नहीं, तुम स्वस्थ हो; इसी नियम में आप समझोगे। तो वो चले गए। कभी-कभी वो मिलता है, फिर भी व्यक्ति छोड़कर चला जाता है, क्योंकि उसे बाहर की व्यवस्था अपने हिसाब से नहीं मिलती — किसी को इज्जत, किसी को कुर्सी नहीं मिलती। देने वाले का अपना स्वभाव है, उसकी मौज है; हो सकता है वो जमीन पर बैठाकर दे — तुम कहो मैं जमीन पर नहीं बैठूंगा, तो इसका मतलब तुम्हें उसकी जरूरत नहीं है। तो मुझे यह देखना है कि अगर मुझे जाना भी पड़ रहा है तो किस वजह से।

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वीडियो: नया भरना बंद कर #योगी · 2026-09-13