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प्रश्नोत्तर P12-0127 · भाग 12

घर-परिवार में बचपन से मां-बाप डालते हैं कि तूने फर्स्ट आना है, मेरी नाक की लाज रखनी है — अपनी अधूरी इच्छाएं बच्चों से पूरी करवाना चाहते हैं। तो अगर मैं गार्डियन के लिए ये प्रश्न रखूं — क्या वो अपने बच्चों से ऐसी इच्छा ना रखें? फिर वो क्या करें?

किसी के द्वारा अगर आप अपनी कामनाएं पूरी करना चाहते हो, और जिसके द्वारा पूरी करना चाहते हो उसकी इच्छा कुछ और है, तो आपको बहुत तकलीफ होने वाली है — इच्छा पूरी होने के बाद भी, नहीं होने के बाद भी। बच्चों से सिर्फ इतनी इच्छा रखनी है कि तुम्हारी जिम्मेदारी मुझे मिली है, और मैं अपनी जिम्मेदारी इस तरीके से पूरी करूंगा कि तुम्हें एक अच्छा जीवन दूंगा; तुम अच्छा जीवन जियो, मैं उसमें तुम्हारा सहयोग करूंगा — कैसे जीना चाहते हो, मुझे बताओ। मैं तुम्हारे साथ खड़ा हूं; मुझे समाज का बहुत अनुभव है, ठोकर लगने से पहले मैं रोक दूंगा। कुछ भी करना, मुझसे बताकर करना, क्योंकि जहां तुम जीने जा रहे हो, मैं वहां जी चुका हूं। अपनी इच्छाएं उस पर ना थोपें; उसकी इच्छा देखें, उसका उचित-अनुचित देखें, क्योंकि अनुभव आपको है, उसको नहीं। उसे दोनों के बारे में बता दो — परिणाम उचित है तो करो, मैं तुम्हारे साथ हूं; उचित नहीं है तो मैं कहूंगा ना करो; करना ही चाहते हो तो करके देख लो, तुम स्वतंत्र हो, लेकिन मैं तुम्हारी बर्बादी में तुम्हारा साथ नहीं दूंगा। इतिहास के पन्ने जब पलटे जाएं, तो मेरा नाम तुम्हारी बर्बादी में नहीं, तुम्हें बचाने वालों में लिखा जाए। आखिर में नाम पुकारा जाएगा और पूरा हिसाब-किताब लिया जाएगा — जैसे क्लास में सबका रोल नंबर पुकारा जाता है और आखिर में परिणाम आता है। इसलिए सचेत होकर जियो, कि जब भी मुझे पुकारा जाए, मैं हमेशा बनाने वालों में खड़ा मिलूं, बिगाड़ने वालों में मेरा नाम ना आए।

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वीडियो: बिना हिसाब के तू जा नहीं पाएगा #योगी · 2026-09-17