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प्रश्नोत्तर P12-0115 · भाग 12

मैंने जिसे जिंदगी भर तवज्जो दी, पूरा समर्पण दिया, अपनी जिंदगी की नैया की पतवार उसके हाथ में दे दी — खुद नहीं खाया, अपने शौक पूरे नहीं किए — अब वो अपनी तो डुबो ही रहा है, मेरी नैया भी डुबोने के कगार पर है। मेरे अंदर उसके लिए बहुत कुंठा और द्वेष है। अब मैं अपने आप को कैसे बचाऊं?

अभी डूब रही है, डूबी नहीं है; तो तुम तो बचा लो अपने आप को। और देखना यह है कि जिसको हमने सौंपा था, क्या सच में उसने डुबाया, कि प्राकृतिक डूब रहा है। क्या सच में उसकी ताकत खत्म हो गई? हो सकता है वो पूरी तरह तुम्हें सुरक्षित रखना चाहता था, अपनी जान की भी बाजी लगा दी, फिर भी वो भी डूब रहा है और तुम भी — तो क्या वो जानकर डुबा रहा है? ये जांचना है। अगर तुमने लंबा समय उसके साथ दिया, तो इसका मतलब कुछ तो सुरक्षा मिल रही थी, तभी तो आप उसके सानिध्य में थे। अगर नैया डूब रही है, तो देखो कि वो विवश तो नहीं, लाचार तो नहीं, उसकी ताकत तो खत्म नहीं हो गई — कहीं मेरे कर्म का हिसाब-किताब इतना तगड़ा तो नहीं था कि बेचारा वो भी मुझे बचाने में मेरे साथ डूब गया? वो निकल सकता था, लेकिन मुझे बचाने में वो भी डूब लिया — ये जांचना पड़ेगा, नहीं तो उसका भी दोष लग जाएगा।

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वीडियो: बिना हिसाब के तू जा नहीं पाएगा #योगी · 2026-09-17