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प्रश्नोत्तर P12-0055 · भाग 12

क्या दृष्टा और साक्षी एक ही हैं? क्या साक्षी होना ही आत्मचिंतन है?

नहीं, साक्षी भाव बनाना पड़ता है, लेकिन दृष्टा मूल है; दृष्टा से ही साक्षी भाव बनेगा। साक्षी भाव तब होता है जब आप कुछ करते हुए अपने आप को देखते हो — क्या सही है, क्या गलत, क्या ईमानदारी है, क्या बेईमानी — और मैं इसका साक्षी हूं कि मैं ईमानदारी-सत्कर्म के साथ जीवन जी रहा हूं। अभी आप कर्ता के भाव में हो, और कर्ता के भाव से मुक्त होने के लिए साक्षी भाव अपनाया है। एक समय ऐसा आएगा कि साक्षी भाव भी खत्म हो जाएगा — जब आप "कुछ नहीं चाहिए" में आ जाओगे, दृष्टा हो जाओगे, भाव खत्म हो जाएगा।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 4 जनवरी 2026 #योगी · 2026-01-04