प्रश्नोत्तर P11-0197 · भाग 11
पहले मेरा भजन में अच्छा मन लगता था, अब भोग में मन बार-बार परास्त कर देता है; शुरू में जो वैराग्य हुआ था, वह ठंडा पड़ गया। मार्गदर्शन दीजिए।
वैराग्य होने का भ्रम था। कहीं ना कहीं भोग आपके तरीके से नहीं मिल रहा था, इसलिए अशांति थी, तो भजन का सहारा लिया — डूबते को तिनके का सहारा; और जब भोग आपके तरीके से मिलने लगा, तो उसमें मस्त हो गए। पास के गांव में एक आदमी गरीब था पर इतना सेवाभावी था कि गांव वालों ने उसे सरपंच बना दिया; सरपंच बनते ही बस क्वार्टर पर साइन करने लगा, अब कोई उसे एक गिलास पानी देने को तैयार नहीं — वह सेवक नहीं था, मजबूरी थी, सेवा से पेट भर जाता था। भजन में तुम आए कब थे? भजन में आना मजबूरी थी — स्वभाव में नहीं, अभाव में, कुभाव में आए थे।
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वीडियो: 11 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2026-01-11