प्रश्नोत्तर P11-0158 · भाग 11
सत्संग से इतना समझ आ रहा है कि मैं शरीर और मन नहीं हूं — शरीर माता-पिता और पोषण से बना, मन बाहरी जानकारियों से। फिर इनके बिना भी क्या मैं कुछ हूं? इस पर अब जिज्ञासा टिक रही है।
एकदम टिकाओ कि इसके बिना मैं क्या हूं। यह मैं नहीं हूं — मैं उंगली नहीं, हाथ नहीं, बाल नहीं, पैर नहीं, मुंह नहीं, सीना नहीं, पेट नहीं; तो आखिर फिर मैं क्या? आखिर में यह प्रश्न खड़ा हो जाता है।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: 11 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2026-01-11