प्रश्नोत्तर P11-0154 · भाग 11
घर जाकर कोई मंत्र वगैरह जाप करना है?
मंत्र यही है — ईमानदार हो जाओ। और मूल मंत्र यही है — स्वीकार कर लो कि आज मैं जहां हूं, उसका जिम्मेदार मैं हूं, मैं यहां से निकलना चाहता हूं, और इसके लिए कुछ भी कर सकता हूं। अगर यह स्वीकार कर लोगे, तो कोई निकालने वाला भी आ जाएगा — कोई दया कर देगा, करुणा कर देगा। लेकिन गुनाह करने के बाद कहोगे मैंने तो कुछ किया ही नहीं, तो जितने आएंगे, दो पटाखा मार के ही जाएंगे। जैसे अपराधी जब तक भागता है, कानून मारता रहता है; जैसे ही कबूल लेता है, मारना बंद, वही लोग भोजन-रहने की व्यवस्था करते हैं; घर में बच्चा चोरी करके जब तक नहीं कबूलता, मार खाता है। तो एकांत में बैठकर कबूल लेना कि इसमें किसी का दोष नहीं, इस दुनिया में एक ही दोषी है — मैं; बाकी सबने तो मेरी सहायता की है।
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वीडियो: 11 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2026-01-11