प्रश्नोत्तर P11-0139 · भाग 11
(एक साधक) धन की कमी नहीं, पर पत्नी नहीं रही, बच्चे विदेश में हैं, घर भूत बंगला लगता है। अध्यात्म में भी भ्रम ही भ्रम दिखता है; जिसके पास गया, उसने लूट लिया। और बच्चे कहते हैं धन भी मत खर्च करो। जीने का आधार ही नहीं है, क्या करूं?
विपत्ति में आपको खुद सामना करना पड़ेगा; अपनी विपत्तियों से मुक्त होने के लिए खुद अपनी सहायता करो, कोई नहीं आने वाला, किसी के पास इतना समय नहीं है। अपनों ने आपको नहीं रखा — उन्होंने अपने तरीके से रखना चाहा, आप अपने तरीके से रहना चाहे; अपनों ने बहुत इज्जत के साथ बेइज्जत किया, तभी आप वहां से भागे। तो आपके पास जितनी ताकत है — धन, तन, समझ — सब अपनी परम शांति के लिए लगा दो, कुछ बचाओ मत; आखिरी में तुम्हारे अलावा तुम्हारे पास कुछ बचना नहीं चाहिए, ताकि कह सको कि तुझे पाने के लिए मैंने सब लुटा दिया। मैं जब निकला था तो 12 ज्योतिर्लिंग की जगह 14 कर लिए (कि असली छूट ना जाए), कर्ज लेकर भी घूमा, ताकि कोई ना कहे कि मैं तेरे दरवाजे पे आया नहीं। बस इतना ध्यान रखना कि ईमानदारी और सत्कर्म हो, किसी को तकलीफ ना हो — कोई कहे कि एक चींटी मारने से परमात्मा मिल जाएगा, तो मैं नहीं मार सकता।
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वीडियो: 11 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2026-01-11