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प्रश्नोत्तर P11-0011 · भाग 11

हमारी जो प्रतिक्रियाएं मन में चलती हैं — कुछ नेगेटिव, कुछ बेकार — जिन्हें हम एक्शन में नहीं लेते, क्या उनसे भी कर्म बनते हैं?

अगर आप शरीर से नहीं करते हो, तो नहीं। वे फिर भी चलती रहती हैं, क्योंकि वे आपकी आदतें हैं; आपने कभी ना कभी उसको किया था, तभी विचार में आती हैं। जैसे आप बाजार जा रहे हो, समोसा बड़ा बढ़िया दिखा; आपने कहा चलो मानसिक खा लो, शरीर से मत खाना — तो क्या बिल देना पड़ेगा? बिल तब दोगे जब शरीर से खाओगे। इस फार्मूले को समझो — बड़ा आसान है निकलना, अगर आप चाहते हो। पहले जरूरत आई, फिर शरीर से किया, शरीर ने उसका सुख लिया, स्वाद लिया, बाद में वह मानसिक में घुसा। अब शरीर से देना बंद करते हो तो मानसिक पीड़ा, बेचैनी होती है। तो पहले शरीर से छोड़ो, बाद में मानसिक भी छूट जाएगा। गड़बड़ यह होती है कि हम शरीर से करते हुए मानसिक छोड़ना चाहते हैं — वह कभी नहीं छूटेगा। और समझ कर छोड़ो: पहले समझना पड़ेगा कि मेरी यह आदत गलत है, इससे बाहरी लाभ भले हो, मैं मानसिक गिर रहा हूं। किसी के कहने पर, बिना समझे छोड़ोगे, तो जिंदगी भर उसके लिए रोओगे, छोड़ नहीं पाओगे।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 22 फरवरी 2026 #योगी · 2026-02-22