प्रश्नोत्तर P10-0047 · भाग 10
सर, आप 4 बजे उठने पर इतना जोर क्यों देते हैं? क्योंकि मैं तो 4 बजे तक पढ़ता हूं।
4 बजे उठने का जोर नहीं दे रहा हूं। अगर आप 4 बजे सोएंगे, तो आराम से 6 घंटा तो नहीं चाहिए। जोर 4 बजे का नहीं दे रहा हूं।
मेरा तो यही कहना है जीवन में, कि आप सोने के पहले और उठने के बाद करते क्या हो। चाहे जब उठो।
अब यहां क्या है। जैसे आप 8 बजे सोने चले गए। मैं कह रहा हूं, 9 बजे नींद आए, 10 बजे आए। अब जब भी नींद आए 8 बजे के बाद, तो सुबह 8 बजे लॉक होगा। तो आप 4 बजे उठे, 5 बजे उठे, या 6 बजे उठे, तो 8 बजे बंद हो जाएगा। उसमें आपको नित्य की क्रिया करनी है। 8 बजे से 8 बजे, 12 घंटे हुए। तो कितना घंटा व्यक्ति सोएगा, 6 घंटे या 8 घंटे।
यहां यह नहीं बोला जा रहा है कि आप 4 बजे उठो, 5 बजे उठो, 6 बजे उठो। यहां का नियम बताया जा रहा है कि 8 बजे सुबह हॉल बंद हो जाएगा और 8 बजे शाम को खुलेगा। उसके पहले आप सो लो, अपना नित्य काम कर लो। अब कोई 9 बजे सोएगा, तो यही कहा जाएगा कि 6 घंटा सोके 8 बजे उठो।
कहने का मतलब 4 बजे या 3 बजे पर जोर नहीं दे रहे हैं। 5 बजे, 6 बजे, 7 बजे, 8 बजे पर भी जोर नहीं दे रहे हैं। यहां 8 बजे चले गए, कोई काम नहीं है, तो सो जाओ। उठ जाओ। अपना आत्मिक चिंतन करो। जिसके लिए आए हो, वो करो।
मैं जोर थोड़ी देता हूं। मैं ना तो किसी और पर जोर देता हूं, ना मैंने अपने आप पर जोर दिया है।
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