प्रश्नोत्तर P1-0144 · भाग 1
(साधना में) चल तो रहा हूं, लेकिन पता नहीं चल रहा कि कहां तक पहुंचा।
इसमें भी तो मालूम पड़ता है कि मैं कहां-कहां लिप्त हूं। अगर इस पर काम करोगे तो देखोगे कि पहले से आसक्ति कम हुई, पहले से समझ विकसित हुई। पहले इस व्यक्ति में, इस वस्तु में ज्यादा आकर्षण था, मोह था, लोभ था — अब कम हो गया; अब मैं जरूरत में उपयोग कर रहा हूं। तो धीरे-धीरे समझ में आता है, यह भी पूरा दिखता है। देखना आना चाहिए।
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