प्रश्नोत्तर P1-0043 · भाग 1
गुरु जी, (लाइव चैट में) मेरे लिखे शब्दों में त्रुटि हो गई; मैं आपसे क्षमा चाहती हूं।
शब्दों में त्रुटि मत करो ना। सोच-समझकर बोलो। जितनी जरूरत है उतना बोलो; जरूरत से ज्यादा क्यों बोलते हो, क्यों फेंकते हो? जितना कर सकते हो, उतना बोलो। क्षमा की जरूरत नहीं है। अगर त्रुटि हो गई तो अभी लाइव में फिर से लिखकर बदल दो। कुछ भी भेजने से पहले पढ़ना चाहिए, क्योंकि आपने भेजा तो सामने वाला वही पढ़ेगा। कोई बात नहीं, त्रुटियां हो जाती हैं — करने वाले से ही त्रुटि होती है। अभी कुछ समय बाकी है, लिख दो; ऐसा न हो कि समय निकल जाए। यह समय किसी का इंतजार नहीं करता।
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