प्रश्नोत्तर P1-0033 · भाग 1
आप जैसे संतों की सेवा करें और उससे परमात्मा-प्राप्ति की इच्छा रखें, तो यह स्वार्थ है या निःस्वार्थ?
नहीं, वैसा कर्म करना पड़ेगा ना। आप ईमानदारी, सत्कर्म और सत्संग अपनाओगे, तो यह हो ही जाएगा — आत्मज्ञान हो ही जाएगा।
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